आसिया कप 2025 के खत्म होने के बाद भी साहिबजादा फरहान अहमद खान ने अपनी विवादित ‘गन फायरिंग’ जश्न की हरकत दोहराई — ये न सिर्फ नियमों की उल्लंघन है, बल्कि खेल की आत्मा के खिलाफ एक जानबूझकर किया गया संकेत है। दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में भारत के खिलाफ अपने आधा शतक के बाद जब उसने पहली बार बल्ले को बंदूक की तरह उठाया था, तो आईसीसी ने उसे सख्त चेतावनी दी थी। लेकिन अब, टूर्नामेंट के बाद एक विज्ञापन शूटिंग में उसने वही जश्न दोहराया — जैसे कि उसने कभी चेतावनी सुनी ही नहीं।
क्या हुआ था आसिया कप में?
25 सितंबर, 2025 को दुबई में हुए भारत-पाकिस्तान के सुपर-4 मैच में, फरहान ने 34 गेंदों में 50 रन बनाए — लेकिन उसका जश्न देखकर कोई खुश नहीं हुआ। भारतीय फील्डर अभिषेक शर्मा के दो बार गलती के बाद भी उसने बल्ले को गन की तरह उठाया और फायर करने का नाटक किया। ये जश्न तुरंत वायरल हो गया। भारतीय मीडिया और फैंस ने इसे न सिर्फ अनैतिक बल्कि राजनीतिक भी बताया — खासकर जब याद आ गया कि पहले ही पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ चुका था।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) ने आईसीसी को आधिकारिक शिकायत दायर कर दी। आईसीसी ने 26 सितंबर को एक सुनवाई बुलाई। फरहान ने बचाव में कहा कि ये उसके पठान समुदाय की पारंपरिक आदत है — जैसे शादियों या जीत के दिन गाँव में बंदूक चलाने की रिवाज। लेकिन आईसीसी के लिए ये बहाना काफी नहीं था। उसने फरहान को सख्त चेतावनी दी, लेकिन जुर्माना नहीं लगाया।
हरिस राऊफ का भी नाम आया
इसी टूर्नामेंट में हरिस राऊफ ने भी अपनी शर्मनाक हरकत दिखाई — भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ एक ‘प्लेन शूटिंग’ जेस्चर किया। आईसीसी ने उसे उसके मैच फीस का 30% जुर्माना लगाया। लेकिन फरहान को सिर्फ चेतावनी — ये फर्क कई लोगों को अजीब लगा। क्या कोई इसे ‘सांस्कृतिक अपवाद’ बता सकता है? या फिर ये सिर्फ एक दोहराव है?
असल में, फरहान ने फाइनल में फिर से आधा शतक बनाया — लेकिन इस बार उसने कोई जश्न नहीं किया। लगता था कि उसने सीख लिया। लेकिन जब टूर्नामेंट खत्म हुआ, तो उसने एक विज्ञापन शूटिंग में वही जश्न दोहराया। ये न सिर्फ बेइंतेहा था, बल्कि एक संकेत भी था — वो बदलने का नाम नहीं ले रहा।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की भूमिका
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी के नेतृत्व में यह टीम लगती है कि खिलाड़ियों की गलतियों को बाहरी दबाव के तहत नजरअंदाज किया जा सकता है। कुछ स्रोतों के मुताबिक, एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) की आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर फरहान का जश्न वीडियो शेयर किया गया — जिसका आईसीसी के लिए कोई अधिकार नहीं था। क्या ये PCB के दबाव से हुआ? कोई साबित नहीं हो पाया, लेकिन इसका असर तो हुआ।
भारतीय मीडिया जैसे TV9 और India TV ने इसे ‘पाकिस्तानी आतंकी संस्कृति’ का हिस्सा बताया। ये बहुत तेज बयान हैं — लेकिन वे एक असली भावना को दर्शाते हैं: जब एक खिलाड़ी खेल के बाहर भी इतना अपमानजनक व्यवहार करता है, तो लोग उसे खेल से जुड़े नहीं, बल्कि राष्ट्रीय भावनाओं से जोड़ने लगते हैं।
फरहान की क्रिकेट उपलब्धि और अंतर
इस साल फरहान ने T20 फॉर्मेट में 102 छक्के मारे — पाकिस्तान का पहला खिलाड़ी जिसने एक कैलेंडर वर्ष में 100 से ज्यादा छक्के मारे। ये उपलब्धि असली है। लेकिन क्या एक खिलाड़ी की उपलब्धि के बावजूद उसकी व्यवहारगत गलतियाँ नजरअंदाज की जा सकती हैं? खेल में नैतिकता भी एक अंक होती है — और फरहान उसे गिरा रहा है।
भारतीय टीम ने आसिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ तीनों मैच जीते। लेकिन जीत का आनंद तब ही पूरा होता है जब खेल का आध्यात्मिक भाव बना रहे। जब एक खिलाड़ी विज्ञापन में भी बंदूक का नाटक करता है, तो ये खेल की बात नहीं, बल्कि एक विरोध का संकेत है।
अगला कदम क्या होगा?
आईसीसी ने अब तक सिर्फ चेतावनी दी है। लेकिन अगर फरहान या कोई और पाकिस्तानी खिलाड़ी फिर से ऐसा करता है, तो शायद अगला कदम बैन होगा। भारतीय फैंस और मीडिया अब चाहते हैं कि आईसीसी इसे एक सामान्य नियम बना दे — कोई भी खिलाड़ी, किसी भी देश का, बंदूक, बम या किसी भी हिंसक जेस्चर का इस्तेमाल न करे।
क्या ये सिर्फ एक खिलाड़ी की गलती है? नहीं। ये एक संस्कृति का प्रतिबिंब है — जहाँ खेल को राजनीति के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। और जब ये बात वायरल हो जाती है, तो ये खेल के लिए नुकसान होता है — न कि बस एक देश के लिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
साहिबजादा फरहान को आईसीसी ने क्यों नहीं जुर्माना लगाया?
आईसीसी ने फरहान को सख्त चेतावनी दी, लेकिन जुर्माना नहीं लगाया क्योंकि उसने अपनी हरकत को पठान समुदाय की सांस्कृतिक परंपरा बताया। आईसीसी के लिए ये ‘सांस्कृतिक व्याख्या’ एक बचाव थी, लेकिन यह निर्णय आलोचना का निशाना बना क्योंकि अन्य खिलाड़ियों को उनके व्यवहार के लिए जुर्माना लगाया गया।
आसिया कप 2025 में पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने क्या अनैतिक हरकतें कीं?
फरहान के अलावा, हरिस राऊफ ने भारतीय खिलाड़ियों के खिलाफ ‘प्लेन शूटिंग’ जेस्चर किया, जिसके लिए उसे 30% मैच फीस का जुर्माना लगा। कुछ मैचों में खिलाड़ियों ने भारतीय टीम के साथ हाथ नहीं मिलाए, जिससे तनाव बढ़ा। इन सबके बावजूद भारत ने तीनों मैच जीते।
फरहान का ये जश्न किस तरह से भारत-पाकिस्तान तनाव से जुड़ा है?
पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच भावनात्मक तनाव बढ़ा था। गन जश्न को भारतीय मीडिया ने उस हमले की याद दिलाने का संकेत माना। ये जेस्चर खेल के बाहर एक राजनीतिक संदेश बन गया — जिसे आईसीसी ने नजरअंदाज नहीं कर सका।
क्या आईसीसी अब ऐसे जेस्चर के लिए सख्त नियम बनाएगा?
हाँ, आईसीसी अब इस मामले पर एक व्यापक गाइडलाइन तैयार करने पर विचार कर रहा है। अगले वर्ष से शायद कोई भी हिंसक या राजनीतिक जेस्चर (बंदूक, बम, युद्ध विमान आदि) जश्न के रूप में इस्तेमाल करने पर तुरंत बैन या भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
फरहान के खिलाफ भारतीय फैंस ने क्या प्रतिक्रिया दी?
भारतीय सोशल मीडिया पर #BoycottFarhan और #NoGunInCricket ट्रेंड हुए। लोगों ने कहा कि खेल में नैतिकता जरूरी है। कुछ ने तो कहा कि अगर ये जश्न अमेरिका या अफ्रीका में होता, तो आईसीसी तुरंत बैन कर देता। ये द्विमान विचार भी विवाद का हिस्सा है।
क्या ये हरकत पाकिस्तानी क्रिकेट की छवि को नुकसान पहुँचा रही है?
बिल्कुल। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया अब पाकिस्तानी टीम को ‘अनैतिक’ और ‘राजनीतिक’ बता रहे हैं। यह न सिर्फ खिलाड़ियों की छवि को नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की नेतृत्व क्षमता के सवाल भी उठा रहा है। अगर ये जारी रहा, तो आने वाले टूर्नामेंट्स में उनकी भागीदारी पर भी सवाल उठ सकते हैं।
Sanket Sonar
नवंबर 25, 2025 AT 11:41गन जश्न नहीं, ये तो खेल की आत्मा को गोली मार रहा है। आईसीसी का चेतावनी देना बस फॉर्मलिटी है। अगर ये अमेरिका में होता तो बैन के बाद भी टीवी पर नहीं दिखता।
pravin s
नवंबर 26, 2025 AT 11:36मैं तो सोच रहा था कि ये बस एक जश्न है, लेकिन जब विज्ञापन में भी दोहराया तो समझ आ गया - ये नियम तोड़ने की इच्छा है। खेल में भावनाएँ तो चलती हैं, लेकिन ये जेस्चर अलग कहानी है।
Bharat Mewada
नवंबर 28, 2025 AT 07:25हर खिलाड़ी की एक छवि होती है, लेकिन जब छवि राष्ट्रीय भावनाओं को टारगेट करने लगे, तो ये खेल नहीं रह जाता। ये एक चिह्न है - जहाँ खेल को राजनीति के लिए बेच दिया जा रहा है। अगर बंदूक चलाना सांस्कृतिक अधिकार है, तो फिर जब एक भारतीय खिलाड़ी ने गुरुद्वारे की ध्वजा उठाई तो उसे क्यों नहीं बैन किया गया?
Vidushi Wahal
नवंबर 30, 2025 AT 03:24क्या कोई ये बता सकता है कि आईसीसी का ये द्विमान व्यवहार क्यों है? हरिस को जुर्माना, फरहान को सिर्फ चेतावनी? ये बस अंधविश्वास है कि कुछ लोगों को छूट मिलती है।
Narinder K
दिसंबर 1, 2025 AT 00:31अरे भाई, ये तो अब खेल का नहीं, बल्कि ट्रेंड का जश्न हो गया। अगला क्या? बम फेंकना? ड्रोन उड़ाना? अब तो टीम ने नाटक बना रखा है।
Narayana Murthy Dasara
दिसंबर 2, 2025 AT 19:59मैं तो बस ये सोच रहा हूँ कि अगर ये जश्न एक अफ्रीकी खिलाड़ी ने किया होता, तो क्या आईसीसी इतना धीरे-धीरे रिएक्ट करता? खेल में नैतिकता तो सबके लिए एक ही होनी चाहिए। ये द्विमान व्यवहार खेल को नुकसान पहुँचा रहा है।
lakshmi shyam
दिसंबर 4, 2025 AT 01:39ये खिलाड़ी नहीं, आतंकी है। आईसीसी को बैन करना चाहिए, चेतावनी नहीं। ये जश्न नहीं, ये घृणा का संकेत है। भारत के खिलाफ ये एक तरह का युद्ध है।
Sabir Malik
दिसंबर 4, 2025 AT 09:25मैंने इस बारे में बहुत सोचा है। खेल के अंदर भावनाएँ तो चलती हैं - जीत का जश्न, गलती का अफसोस, लेकिन जब ये जश्न बंदूक की तरह हो जाए, तो ये बस एक भावनात्मक विरोध बन जाता है। मैंने पठान समुदाय के लोगों से बात की है - वो भी कहते हैं कि गाँव में बंदूक चलाना शादी या जीत के लिए होता है, लेकिन वो भी अब इसे बंदूक नहीं, बल्कि तलवार या धनुष के जरिए दिखाते हैं। ये जश्न अब ट्रेंड हो गया है, न कि संस्कृति।
Debsmita Santra
दिसंबर 6, 2025 AT 01:47ये जश्न जिस तरह से वायरल हुआ उसमें एक गहरा संदेश है - खेल को राजनीति में बदल दिया जा रहा है। आईसीसी को अब एक एन्कोडेड गाइडलाइन बनानी होगी - कोई भी हिंसक जेस्चर, चाहे वो बंदूक हो या बम या युद्ध विमान, उसे बैन कर देना चाहिए। ये सिर्फ एक खिलाड़ी की गलती नहीं, ये एक संस्कृति का अपवाद है जो अब टूर्नामेंट के लिए खतरा बन गया है। और अगर PCB इसे अपने सोशल मीडिया पर शेयर कर रहा है, तो ये एक संगठित रणनीति है। नहीं तो ये बस एक खिलाड़ी की बेइंतेहा गलती होती।
Vasudha Kamra
दिसंबर 6, 2025 AT 03:51आईसीसी को अब एक स्पष्ट, व्यापक नियम बनाना चाहिए - कोई भी खिलाड़ी, किसी भी देश का, हिंसक जेस्चर का इस्तेमाल न करे। ये सिर्फ एक जश्न नहीं, ये खेल की नैतिकता का प्रश्न है।
Abhinav Rawat
दिसंबर 7, 2025 AT 23:15ये बात बहुत गहरी है। जब एक खिलाड़ी अपनी जीत को बंदूक के जरिए दिखाता है, तो वो न सिर्फ खेल की नैतिकता को तोड़ रहा है, बल्कि एक ऐसी भावना को भी जगा रहा है जो खेल के बाहर चल रही है - विरोध, घृणा, राष्ट्रीय अहंकार। और जब आईसीसी इसे चेतावनी तक सीमित रखता है, तो ये एक संकेत देता है कि खेल की नैतिकता को अब बाहरी दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ के आधार पर निर्धारित किया जा रहा है। ये खेल की आत्मा के लिए एक अंतिम धमकी है।
Shashi Singh
दिसंबर 8, 2025 AT 02:17ये सब एक नाटक है! आईसीसी और PCB एक साथ मिलकर ये बना रहे हैं - भारत को बदनाम करने के लिए! फरहान को चेतावनी देने की जगह उसे बैन कर देना चाहिए था - ये सब एक धोखा है! अगर आप जानते हो कि आईसीसी के अंदर कौन है, तो आप जान जाएंगे कि ये सब ब्रिटिश-अमेरिकी साम्राज्य की योजना है - वो चाहते हैं कि एशिया में तनाव बढ़े, ताकि वो क्रिकेट टूर्नामेंट्स के लिए अधिक पैसा कमा सकें! और ये विज्ञापन शूटिंग? वो एक ट्रैक्टर के पीछे छिपे हुए ड्रोन की तरह है - जो आपको नहीं दिखता, लेकिन आपके दिमाग में बम लगा रहा है! #ConspiracyExposed #CricketIsWar
Surbhi Kanda
दिसंबर 9, 2025 AT 13:08ये जश्न अब खेल का हिस्सा नहीं, ये एक आतंकी टैगलाइन है। आईसीसी को इसे नजरअंदाज करना चाहिए था? नहीं। इसे बैन करना चाहिए था। और PCB को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। ये एक टीम का बर्ताव है - न कि एक खिलाड़ी का।
Sandhiya Ravi
दिसंबर 10, 2025 AT 06:40मैं तो सोच रही हूँ कि अगर ये जश्न किसी भारतीय खिलाड़ी ने किया होता, तो आईसीसी क्या करता? शायद तुरंत बैन कर देता। लेकिन ये द्विमान व्यवहार खेल को नुकसान पहुँचा रहा है। हमें खेल को राजनीति से अलग करना होगा। खेल का मकसद तो एकता है - न कि विभाजन।